डिजिटल फ़ुटप्रिंट

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पाँच दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण श्रृंखला

"डिजिटल फुटप्रिंट"

आज के डिजिटल युग में जब हम इंटरनेट का उपयोग करते हैं–जैसे वेबसाइट देखना, सोशल मीडिया चलाना, ऑनलाइन क्लास करना, पढ़ाई के ऐप या प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना, तो हमारी हर ऑनलाइन गतिविधि के कुछ डिजिटल निशान रह जाते हैं। इन्हीं निशानों को डिजिटल फुटप्रिंट कहा जाता है। वर्तमान समय में विद्यालय एवं शैक्षिक संस्थान प्रशासन, संचार, मूल्यांकन तथा शिक्षण–अधिगम प्रक्रियाओं के लिए डिजिटल साधनों का अधिक उपयोग कर रहे हैं। इससे काम आसान और तेज़ होता है, लेकिन इसके साथ बहुत सारा व्यक्तिगत और संस्थागत डिजिटल डेटा भी बनता है। यदि इस डेटा का सही और सावधानीपूर्वक उपयोग न किया जाए, तो इसका भविष्य में दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।

डिजिटल फुटप्रिंट दो तरह का होता है। एक सक्रिय डिजिटल फुटप्रिंट वह है, जिसमें हम जानबूझकर ऑनलाइन जानकारी साझा करते हैं, जैसे पोस्ट करना या फोटो डालना। दूसरा निष्क्रिय डिजिटल फुटप्रिंट वह है, जिसमें कुकीज़, ऐप्स और ट्रैकिंग तकनीकों के ज़रिए अपने-आप डेटा इकट्ठा हो जाता है। अगर डिजिटल फुटप्रिंट को ठीक से नियंत्रित न किया जाए, तो इससे व्यक्ति और संस्थान कई तरह के जोखिमों में पड़ सकते हैं, जैसे पहचान का दुरुपयोग, प्रतिष्ठा को नुकसान , ऑनलाइन परेशान किया जाना और बिना अनुमति डेटा का इस्तेमाल। इसलिए शिक्षकों, छात्रों और प्रशासकों के लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि डिजिटल फुटप्रिंट कैसे बनता है, इसे कैसे सुरक्षित रखा जाए और इसका सही उपयोग कैसे किया जाए। यही डिजिटल समझ और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार का अहम हिस्सा है।

डिजिटल फुटप्रिंट से जुड़े साइबर खतरे आज बहुत आम हो गए हैं। इनमें सोशल मीडिया पर ज़रूरत से ज़्यादा जानकारी साझा करना, ऑनलाइन असुरक्षित बातचीत करना, बिना जाँच के ऐप्स इस्तेमाल करना, प्राइवेसी सेटिंग्स का ठीक न होना और यह न समझना कि ऑनलाइन डाला गया डेटा लंबे समय तक रहता है- ये सब शामिल हैं। ये खतरे केवल व्यक्तियों को ही नहीं, बल्कि छात्रों की सुरक्षा और संस्थानों की विश्वसनीयता को भी प्रभावित कर सकते हैं। इन जोखिमों को कम करने के लिए शिक्षकों और विद्यालय के अधिकारियों के लिए यह सीखना आवश्यक है कि ऑनलाइन अपनी जानकारी कैसे सुरक्षित रखें, गोपनीयता सेटिंग्स कैसे सही करें, उचित ऑनलाइन व्यवहार क्या है और नकारात्मक डिजिटल निशानों से कैसे बचा जाए।

व्यक्ति की समझ ज़रूरी है, लेकिन तकनीक का सही और सुरक्षित उपयोग सिखाने में स्कूलों और शैक्षिक संस्थानों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। स्कूलों को ऑनलाइन व्यवहार के लिए स्पष्ट नियम बनाने चाहिए, डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुरक्षित उपयोग सिखाना चाहिए और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार की आदत विकसित करनी चाहिए। शिक्षकों, छात्रों और प्रशासनिक कर्मचारियों को यह समझाना कि डिजिटल फुटप्रिंट क्या है और इसे कैसे सही तरीके से संभालें, एक सुरक्षित, सम्मानजनक और भरोसेमंद डिजिटल सीखने का माहौल बनाने में सहायता करता है।

“डिजिटल फुटप्रिंट” ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों और शैक्षिक संस्थानों से जुड़े हितधारकों को डिजिटल फुटप्रिंट को बेहतर ढंग से समझने और उसका प्रभावी प्रबंधन करने में सहायता करना है। यह पाठ्यक्रम डिजिटल फुटप्रिंट की स्पष्ट अवधारणा प्रदान करेगा तथा यह समझ विकसित करेगा कि डिजिटल फुटप्रिंट कैसे बनता है, ऑनलाइन किए गए कार्यों के दीर्घकालिक प्रभाव क्या हो सकते हैं और डिजिटल वातावरण में प्रतिष्ठा एवं गोपनीयता की सुरक्षा कैसे की जा सकती है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागी छात्रों को ऑनलाइन सही और सोच-समझकर फैसले लेने के लिए मार्गदर्शन करना तथा उन्हें जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना भी सीखेंगे।

यह रणनीति राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप है, जिसमें कक्षा में डिजिटल साक्षरता, साइबर सुरक्षा और तकनीक के जिम्मेदार उपयोग पर विशेष ज़ोर दिया गया है। एनईपी 2020 (अनुभाग 23–24) शिक्षकों और छात्रों को डिजिटल वातावरण में सुरक्षित, सोच-समझकर और नैतिक तरीके से कार्य करने के लिए तैयार करने के महत्व को रेखांकित करती है।

इसी निर्देश के अनुसार, केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान (CIET), एनसीईआरटी, भारत सरकार (GoI), नई दिल्ली- 110016, साइबरपीस के सहयोग से एक पाँच घंटे का ऑनलाइन प्रशिक्षण सत्र आयोजित कर रहा है।

प्रशिक्षण सत्र का अंग्रेज़ी संस्करण 05 - 09 जनवरी, 2026 तक और हिंदी संस्करण 12 से 16 जनवरी, 2026 तक आयोजित किया जाएगा। प्रत्येक दिन शाम 4:00 बजे से 5:00 बजे तक लाइव सत्र आयोजित किए जाएंगे।

ये सत्र एनसीईआरटी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर प्रसारित किए जाएंगे तथा साथ ही पीएम ई-विद्या डीटीएच टीवी चैनल (6–12) और जियो टीवी मोबाइल एप्लिकेशन पर भी एक साथ प्रदर्शित किए जाएंगे। सभी सत्रों की रिकॉर्डिंग भविष्य में संदर्भ हेतु एक विशेष प्लेलिस्ट के माध्यम से भी उपलब्ध कराई जाएगी।

प्रशिक्षण के उद्देश्य:

प्रशिक्षण के अंत तक प्रतिभागी निम्नलिखित में सक्षम होंगे:

  1. डिजिटल फुटप्रिंट की अवधारणा, उसके प्रकारों और उनके प्रभावों को समझना।
  2. शैक्षिक संदर्भ में डिजिटल फुटप्रिंट के उचित प्रबंधन न होने से जुड़े जोखिमों की पहचान करना।
  3. छात्रों और स्टाफ के बीच जिम्मेदार, नैतिक और आत्म-चिंतनशील ऑनलाइन व्यवहार को बढ़ावा देना।
  4. संस्थानों को सुरक्षित डिजिटल उपस्थिति प्रबंधन के लिए उपयुक्त अभ्यास विकसित करने में मार्गदर्शन देना।
  5. डिजिटल रूप से जिम्मेदार और डिजिटल फुटप्रिंट के प्रति जागरूक शैक्षिक वातावरण बनाने के लिए व्यावहारिक रणनीतियों को लागू करना।
कार्यक्रम की समय-सारिणी:
दिन एवं तिथि सत्र का शीर्षक संसाधन विशेषज्ञ का नाम बैनर प्रस्तुति यूट्यूब लिंक
दिन - 1:
सोमवार
12 जनवरी, 2026
डिजिटल फुटप्रिंट अवधारणा एवं आवश्यकता श्री एम.ए.के.पी. सिंह, मुख्य तकनीकी अधिकारी, साइबरपीस Day 1 Presentation-1 Video
दिन - 2:
मंगलवार
13 जनवरी, 2026
सोशल मीडिया पर अधिक साझा करने के जोखिम और साइबर फर्स्ट रिस्पॉन्डर की भूमिका श्री संजय कुमार दास (साइबरपीस सलाहकार), अतिरिक्त सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग एवं राज्य सूचना सुरक्षा अधिकारी, पश्चिम बंगाल Day 2 Presentation-2 Video
दिन - 3:
बुधवार
14 जनवरी, 2026
ऑनलाइन गोपनीयता गलतियों का प्रभाव डॉ. मनीष प्रतीक, प्रोफेसर एवं प्रो-कुलपति, डीबीएस ग्लोबल यूनिवर्सिटी Day 3 Presentation-3 Video
दिन - 4:
गुरुवार
15 जनवरी, 2026
स्थायी डिजिटल रिकॉर्ड के कानूनी पहलू डॉ. अपराजिता भट्ट एसोसिएट प्रोफेसर,नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली Day 4 Presentation-4 Video
दिन - 5:
शुक्रवार
16 जनवरी, 2026
एआई युग में डिजिटल फुटप्रिंट का भविष्य डॉ. राकेश माहेश्वरी, पूर्व समूह समन्वयक (साइबर क़ानून एवं ई-सुरक्षा) इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार Day 5

आयोजक टीम

कार्यक्रम सलाहकार:

प्रो. अमरेन्द्र प्रसाद बेहेरा, (अल्पकालीन) संयुक्त निदेशक एवं प्रमुख- जनसंपर्क विभाग (PRD), केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईईटी), एनसीईआरटी, नई दिल्ली- 110016

प्रो. इंदु कुमार, प्रमुख, डीआईसीटी, केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईईटी), एनसीईआरटी, नई दिल्ली- 110016

कार्यक्रम समन्वयक एवं पाठ्यक्रम समन्वयक:

डॉ. एंजेल रत्नाबाई, सह आचार्य, केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईईटी), एनसीईआरटी, नई दिल्ली- 110016

तकनीकी समन्वयक:

सुश्री आकांक्षा, शैक्षणिक सलाहकार, केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईईटी), एनसीईआरटी, नई दिल्ली- 110016

श्री सोमेश कुमार, जूनियर प्रोजेक्ट फेलो, केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईईटी), एनसीईआरटी, नई दिल्ली- 110016

प्रतिभागिता की प्रक्रिया

चरण 1 : पंजीकरण:
प्रतिभागियों को निम्नलिखित लिंक का उपयोग करके पंजीकरण करना होगा-
https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLScecVhg_uErEkIWsoVxt1YbpH03sNC3ZunZJIk6iSgY5porLA/viewform या QR कोड स्कैन करें -

चरण 2 : लाइव सत्र देखें और विषय के बारे में सीखें:
प्रतिभागियों को प्रशिक्षण सत्रों में सम्मिलित होना होगा जो एनसीईआरटी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल http://youtube.com/ncertofficial पर 12 से 16 जनवरी, 2026, शाम 4:00 बजे से 5:00 बजे तक (सोमवार से शुक्रवार)सीधे प्रसारित किए जाएंगे।


सत्र निम्न माध्यमों पर भी लाइव प्रसारित किए जाएंगे:
  • पीएम ईविद्या चैनल #6-12
  • डीडी फ्री डिश चैनल
  • डिश टीवी चैनल #2027-2033
  • जियो टीवी मोबाइल ऐप

यदि कोई प्रतिभागी लाइव सत्र नहीं देख पाता है, तो वह रिकॉर्डिंग निम्नलिखित प्लेलिस्ट लिंक से देख सकता है:
https://youtube.com/playlist?list=PLcsj1x9n9h4gBJTy1qEsLQTNmxCaxZ7CH&si=uCIyaUCa1MX4f4u8


चरण 3: ऑनलाइन कोर्स में भाग लें, पोस्ट-आकलन में हिस्सा लें और प्रमाणपत्र प्राप्त करें:

जो प्रतिभागी प्रमाणपत्र प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें निम्नलिखित कदम उठाने होंगे:

  • ऑनलाइन कोर्स जॉइन करें: यह कोर्स “दीक्षा” पोर्टल पर लॉन्च किया जाएगा। कोर्स का लिंक प्रशिक्षण के अंतिम दिन शाम 7 बजे तक इवेंट पेज पर अपडेट कर दिया जाएगा। यह कोर्स 15 मार्च 2026 तक उपलब्ध रहेगा।
  • प्रतिभागियों को कोर्स में शामिल होना होगा और सभी पाँच वीडियो देखने होंगे।
  • प्रतिभागियों को अंतिम मूल्यांकन देना अनिवार्य है। प्रतिभागी तीन बार तक मूल्यांकन का प्रयास कर सकते हैं।
  • जो प्रतिभागी अंतिम मूल्यांकन में 70% या उससे अधिक अंक प्राप्त करेंगे, उन्हें प्रमाणपत्र दिया जाएगा। प्रमाणपत्र उनके DIKSHA प्रोफ़ाइल पेज पर उपलब्ध होगा।
    प्रमाणपत्र प्राप्त करने में 15–20 दिन का समय लग सकता है।

चरण 4: फीडबैक जमा करें:
प्रतिभागियों से अपेक्षा की जाती है कि वे निम्न लिंक का उपयोग करके फीडबैक जमा करें:
https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSe-OWuWvtRjqGjCofgVokaqOxgO2VNutP1JmMCFA3rcCGn9Dg/viewform

यह फीडबैक फॉर्म प्रतिभागियों के अनुभव, सीख और ऑनलाइन प्रशिक्षण से संबंधित सुझाव जानने के लिए बनाया गया है। इससे भविष्य में वर्चुअल प्रशिक्षण प्रक्रिया में सुधार करने में सहायता मिलेगी।

किसी भी जानकारी के लिए, यहां मेल करें: training.helpdesk@ciet.nic.in या कॉल करें: 8800440559.

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