साइबर धोखाधड़ी में मानवीय हेरफेर: निवारण और संरक्षण

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ऑनलाइन प्रशिक्षण

"साइबर धोखाधड़ी में मानवीय हेरफेर: निवारण और संरक्षण"

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 इस बात पर बल देती है कि शिक्षा में प्रौद्योगिकी के एकीकरण के साथ-साथ सुरक्षित, नैतिक तथा उत्तरदायी डिजिटल सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक उपाय भी किए जाने चाहिए। यह शिक्षा में पहुँच, समानता, गुणवत्ता तथा शैक्षिक नियोजन को सुदृढ़ बनाने में प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका को स्वीकार करती है, साथ ही डिजिटल सुरक्षा, गोपनीयता एवं संरक्षा से संबंधित चिंताओं के समाधान की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालती है (अध्याय 23: प्रौद्योगिकी का उपयोग एवं एकीकरण, अनुभाग 23.1–23.8)। विद्यालयी शिक्षा हेतु राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ-एसई, 2023) भी डिजिटल साक्षरता, डिजिटल नागरिकता, नैतिक जागरूकता तथा प्रौद्योगिकी के उत्तरदायी उपयोग को एक बढ़ती हुई डिजिटल दुनिया में शिक्षार्थियों के लिए आवश्यक दक्षताओं के रूप में रेखांकित करती है (भाग-बी, अनुभाग 6.4)।

जैसे-जैसे डिजिटल प्रौद्योगिकियाँ शिक्षा तथा दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनती जा रही हैं, साइबर खतरे केवल उपकरणों और नेटवर्कों पर आक्रमण तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि अब वे मानव व्यवहार, भावनाओं और निर्णय-निर्माण प्रक्रियाओं को भी लक्षित कर रहे हैं। वर्तमान समय में साइबर धोखाधड़ी प्रायः विश्वास, जिज्ञासा, भय, तात्कालिकता तथा जागरूकता की कमी का लाभ उठाकर व्यक्तियों को संवेदनशील जानकारी साझा करने, वित्तीय लेन-देन करने अथवा व्यक्तिगत एवं संस्थागत आँकड़ों तक अनधिकृत पहुँच प्रदान करने के लिए प्रेरित करती है (Cybersecurity and Infrastructure Security Agency [CISA], 2024)। परिणामस्वरूप, प्रत्येक डिजिटल उपयोगकर्ता संभावित लक्ष्य बन जाता है, जिससे जागरूकता और सतर्कता साइबर सुरक्षा के अनिवार्य घटक बन जाते हैं।

साइबर धोखाधड़ी के सबसे प्रचलित रूपों में फिशिंग (Phishing), विशिंग (Vishing) तथा स्मिशिंग (Smishing) शामिल हैं, जिनमें अपराधी भ्रामक ई-मेल, फोन कॉल तथा टेक्स्ट संदेशों के माध्यम से व्यक्तियों को पासवर्ड, वित्तीय जानकारी अथवा व्यक्तिगत विवरण साझा करने के लिए छलपूर्वक प्रेरित करते हैं। ये धोखाधड़ियाँ लगातार बढ़ती जा रही हैं तथा प्रायः बैंक, सरकारी एजेंसियों, विद्यालयों अथवा सेवा प्रदाताओं जैसी विश्वसनीय संस्थाओं का रूप धारण कर रही हैं। डिजिटल भुगतान प्रणालियों तथा ऑनलाइन संचार मंचों के तेजी से विस्तार ने भी ऐसी धोखाधड़ीपूर्ण गतिविधियों के अवसरों को बढ़ावा दिया है (INTERPOL, 2024)।

यद्यपि फिशिंग, विशिंग और स्मिशिंग जैसी साइबर धोखाधड़ी की तकनीकें अभी भी गंभीर जोखिम उत्पन्न करती हैं, फिर भी उभरती हुई प्रोद्योगिकियों ने कृतिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित हेर-फेर के माध्यम से साइबर छल के नए रूपों को जन्म दिया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग अब अत्यंत विश्वसनीय नकली चित्र, वीडियो, आवाज़ें और संदेश तैयार करने के लिए किया जा रहा है, जो वास्तविक व्यक्तियों की सटीक नकल कर सकते हैं। डीपफेक (Deepfakes) तथा सिंथेटिक मीडिया (Synthetic Media) का उपयोग भ्रामक सूचना फैलाने, वित्तीय धोखाधड़ी को बढ़ावा देने, प्रतिष्ठा को क्षति पहुँचाने तथा अनजान उपयोगकर्ताओं को गुमराह करने के लिए किया जा रहा है। इन परिस्थितियों में व्यक्तियों के लिए अपनी आलोचनात्मक चिंतन क्षमता तथा सत्यापन कौशल को सुदृढ़ करना आवश्यक हो गया है, ताकि वे प्रामाणिक सामग्री और कृत्रिम रूप से निर्मित डिजिटल सामग्री के बीच अंतर कर सकें (UNESCO, 2023; IBM Security, 2024)।

शैक्षिक संस्थान भी इन बढ़ते साइबर खतरों से अछूते नहीं हैं। शिक्षक, विद्यार्थी, विद्यालय प्रशासक तथा अभिभावक नियमित रूप से डिजिटल मंचों, ऑनलाइन संचार साधनों तथा क्लाउड-आधारित शैक्षिक सेवाओं का उपयोग करते हैं, जिससे वे साइबर धोखाधड़ी के संभावित लक्ष्य बन जाते हैं। फर्जी छात्रवृत्ति प्रस्ताव, नकली भर्ती संदेश, सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिरूपण (Impersonation), आधिकारिक संचार के रूप में प्रेषित फिशिंग ई-मेल तथा ऑनलाइन भुगतान संबंधी धोखाधड़ियाँ शैक्षिक समुदाय के सदस्यों को बड़े स्तर पर प्रभावित कर रही हैं (UNESCO, 2023)। जैसे-जैसे डिजिटल अधिगम के वातावरण का विस्तार हो रहा है, वैसे-वैसे शिक्षा से जुड़े सभी हितधारकों के बीच हेरफेर-आधारित साइबर खतरों के प्रति जागरूकता और उनसे सुरक्षित रहने की क्षमता विकसित करना अत्यंत आवश्यक हो गया है।

मानव व्यवहार कू साइबर धोखाधड़ी के विरुद्ध सुरक्षा की पहली और सबसे महत्वपूर्ण परत मन जाता है, जिसे सामान्यतः “मानवीय फायरवॉल (Human Firewall)” कहा जाता है। संदिग्ध संचार की पहचान करना, सूचनाओं का सत्यापन करना, अप्रत्याशित अनुरोधों पर प्रश्न उठाना तथा सूचित निर्णय लेना साइबर अपराधों के प्रति संवेदनशीलता को उल्लेखनीय रूप से कम कर सकता है। शिक्षक इस मानवीय फायरवॉल को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन विकसित करते हैं, साइबर सुरक्षा संबंधी सुरक्षित व्यवहार को बढ़ावा देते हैं, साइबर धोखाधड़ी के चेतावनी संकेतों की पहचान करना सीखाते हैं, व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हैं तथा जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार अपनाने के लिय प्रेरित करते हैं। ऐसी जागरूकता सुरक्षित डिजिटल शिक्षण वातावरण के निर्माण और जिम्मेदार डिजिटल नागरिकों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है। (UNESCO, 2023; NCF-SE, 2023)।

शिक्षकों और शिक्षार्थियों के बीच जागरूकता तथा सुरक्षात्मक कौशलों को सुदृढ़ करने की बढ़ती आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, सीआईईटी-एनसीईआरटी, आईएसईए-सी-डैक, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सहयोग से "साइबर धोखाधड़ी में मानवीय हेरफेर: निवारण और संरक्षण" विषय पर एक ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है। यह प्रशिक्षण मानव-केंद्रित साइबर खतरों की समझ विकसित करने, डिजिटल धोखे के उभरते स्वरूपों की पहचान करने, सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार को बढ़ावा देने तथा प्रतिभागियों को स्वयं और अपने समुदायों को साइबर धोखाधड़ी से सुरक्षित रखने हेतु सशक्त बनाने पर केंद्रित होगा। साथ ही यह कार्यक्रम जिम्मेदार डिजिटल नागरिकता के विकास को भी प्रोत्साहित करेगा तथा सुरक्षित डिजिटल अधिगम वातावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

उद्देश्य

प्रशिक्षण पूर्ण करने के उपरांत शिक्षार्थी:

  • लोगों को निशाना बनाने वाले साइबर खतरों और व्यक्तियों व शैक्षिक समुदायों पर पड़ने वाले प्रभावों को समझ सकेंगे।
  • आम साइबर धोखाधड़ी जैसे फिशिंग, विशिंग तथा स्मिशिंग की पहचान कर सकेंगे और उनसे जुड़े चेतावनी के संकेतों को समझ सकेंगे।
  • यह स्पष्ट कर सकेंगे कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डीपफेक तथा सिंथेटिक मीडिया का उपयोग साइबर धोखे को सक्षम बनाने में किस प्रकार किया जाता है।
  • सोशल मीडिया पर अत्यधिक जानकारी साझा करने (Oversharing), डिजिटल पदचिह्नों (Digital Footprints) तथा ऑनलाइन प्रोफाइलिंग से जुड़े जोखिमों का विश्लेषण कर सकेंगे।
  • डिजिटल प्रतिरूपण तथा साइबर धोखाधड़ी से व्यक्तिगत, वित्तीय एवं संस्थागत जानकारी की सुरक्षा हेतु सुरक्षित उपायों को अपनाने में सक्षम होंगे।
  • साइबर सुरक्षा उपायों को अपनाकर तथा साइबर घटनाओं की उचित रिपोर्टिंग करके उत्तरदायी डिजिटल नागरिकता को बढ़ावा दे सकेंगे।
कार्यक्रम अनुसूची:
दिन एवं तिथि सत्र का शीर्षक विषय विशेषज्ञ का नाम बैनर लिंक प्रस्तुतीकरण लिंक वीडियो लिंक
दिन 1:
सोमवार
06 जुलाई, 2026
मानवीय फायरवॉल: मानव-केंद्रित साइबर खतरों की समझ सुश्री सोनल कमल, नॉलेज एसोसिएट, सी-डैक, पटना, बिहार – 800001 दिन 1
दिन 2:
मंगलवार
07 जुलाई, 2026
फिशिंग, विशिंग और स्मिशिंग: आधुनिक साइबर धोखाधड़ी की तिकड़ी श्री दिव्यांश बघेल, प्रोजेक्ट एसोसिएट, सी-डैक, मुंबई, महाराष्ट्र – 400614 दिन 2
दिन 3:
बुधवार
08 जुलाई, 2026
एआई-संचालित हेरफेर: साइबर छल का नया स्वरूप श्री अंशुल टेलर, परियोजना अभियंता, सी-डैक, बेंगलुरु, कर्नाटक – 560100 दिन 3
दिन 4:
गुरुवार
09 जुलाई, 2026
सोशल मीडिया पर अत्यधिक जानकारी साझा करना और डिजिटल प्रोफाइलिंग सुश्री सुमेरा फारूक, परियोजना अभियंता, सी-डैक, मोहाली, पंजाब – 160071 दिन 4
दिन 5:
शुक्रवार
10 जुलाई, 2026
डिजिटल प्रतिरूपण से स्वयं को सुरक्षित रखना सुश्री प्रभा कुमारी, परियोजना अभियंता, सी-डैक, नोएडा, उत्तर प्रदेश – 201307 दिन 5

आयोजन टीम

कार्यक्रम परामर्शदाता :

प्रो. अमरेन्द्र पी. बेहरा, संयुक्त निदेशक, केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान, एनसीईआरटी, नई दिल्ली।

प्रो. शिरीष पाल सिंह, विभागाध्यक्ष, डीआईसीटी एवं टीडी, केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान, एनसीईआरटी, नई दिल्ली।

कार्यक्रम समन्वयक एवं पाठ्यक्रम समन्वयक :

डॉ. एंजेल रत्नाबाई, एसोसिएट प्रोफेसर, केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान, एनसीईआरटी, नई दिल्ली।

सहयोगकर्ता:

डॉ. चि. ए. एस. मूर्ति, वैज्ञानिक-जी एवं मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी (प्रभारी), आईएसईए (ISEA) – सी-डैक (CDAC)

तकनीकी समन्वयक :

डॉ. गीता धस्माना, अकादमिक परामर्शदाता, केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान, एनसीईआरटी, नई दिल्ली।

श्री कैलाश सिंह, वरिष्ठ तकनीकी परामर्शदाता, केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान, एनसीईआरटी, नई दिल्ली।

कार्यप्रणाली (Modality)

इस ऑनलाइन प्रशिक्षण की सभी सत्रों का सीधा प्रसारण NCERT के आधिकारिक YouTube चैनल - NCERT Official YouTube Channel पर किया जाएगा तथा PM e-Vidya DTH टीवी चैनल्स (6–12) पर प्रतिदिन सायं 4:00 बजे से 5:00 बजे तक एक साथ प्रसारित किया जाएगा। सत्रों का लाइव प्रसारण निम्न माध्यमों पर भी उपलब्ध रहेगा:

  • DD Free Dish चैनल
  • DISH TV चैनल #2027–2033
  • Jio TV मोबाइल ऐप

रिकॉर्डेड सत्र एक समर्पित YouTube प्लेलिस्ट के माध्यम से भी उपलब्ध रहेंगे। शिक्षार्थी संबंधित विषय की बेहतर समझ विकसित करने हेतु इन लाइव अथवा रिकॉर्डेड सत्रों का अवलोकन कर सकते हैं।

यदि शिक्षार्थी 50 घंटे के सतत व्यावसायिक विकास (CPD) के अंतर्गत मान्य प्रमाणपत्र प्राप्त करना चाहते हैं, तो उन्हें DIKSHA पोर्टल पर उपलब्ध ऑनलाइन पाठ्यक्रम से जुड़ना होगा। पाठ्यक्रम का लिंक लाइव सत्र के अंतिम दिन साझा किया जाएगा। पाठ्यक्रम से जुड़ने के पश्चात शिक्षार्थियों को निम्न कार्य पूर्ण करने होंगे। सभी आवश्यकताओं को सफलतापूर्वक पूरा करने पर डिजिटल प्रमाणपत्र पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाएगा। यह प्रमाणपत्र उनके प्रोफ़ाइल पृष्ठ पर भी उपलब्ध रहेगा तथा उसे डाउनलोड करने के साथ-साथ DigiLocker में भी प्राप्त किया जा सकेगा।
शिक्षार्थियों को निम्न कार्य पूर्ण करने होंगे:

  • पाठ्यक्रम में उपलब्ध सभी डिजिटल संसाधनों का अध्ययन करना
  • पाठ्यक्रम में दी गई गतिविधियों में सहभागिता करना
  • अंतिम मूल्यांकन में तीन प्रयासों के भीतर न्यूनतम 70% अंक प्राप्त करना
  • प्रतिपुष्टि (Feedback) प्रपत्र भरना

पाठ्यक्रम में सहभागिता कैसे करें?

महत्वपूर्ण तिथियाँ :

पाठ्यक्रम का शीर्षक तिथियाँ
साइबर धोखाधड़ी में मानवीय हेरफेर: निवारण और संरक्षण लाइव सत्र : 06–10 जुलाई, 2026

पाठ्यक्रम नामांकन प्रारम्भ तिथि : 11 जुलाई 2026

पाठ्यक्रम नामांकन की अंतिम तिथि : 10 मार्च 2027

पाठ्यक्रम समापन तिथि : 15 मार्च 2027

जो शिक्षार्थी केवल लाइव सत्र में सहभागिता करना चाहते हैं तथा प्रमाणपत्र प्राप्त करने का उद्देश्य नहीं रखते हैं, वे निम्न चरण का पालन करें :
  • NCERT के आधिकारिक YouTube चैनल / PM eVidya DTH टीवी चैनल पर लाइव सत्र देखें तथा विशेषज्ञों के साथ संवाद करें।
  • सत्रों की रिकॉर्डिंग निम्न प्लेलिस्ट लिंक के माध्यम से भी देखी जा सकती है :
  • https://youtube.com/playlist?list=PLCC5Wj0EaPAs&si=H8UPU4pAQGxpZeAq

जो शिक्षार्थी प्रमाणपत्र प्राप्त करना चाहते हैं, वे निम्न चरणों का पालन करें :
  • चरण 1: DIKSHA पर पंजीकरण करें। अपनी APAAR ID तथा DigiLocker ID को लिंक करें। (यदि आपके पास APAAR ID या DigiLocker ID नहीं है, तो पहले उसे बनाएं और उसके बाद DIKSHA पोर्टल पर विवरण जोड़ें। यदि यह प्रक्रिया पहले से पूर्ण है, तो इस चरण को छोड़ा जा सकता है।)
  • चरण 2: पाठ्यक्रम लिंक का उपयोग करके ऑनलाइन पाठ्यक्रम से जुड़ें। (लिंक 11 जुलाई 2026 को अपडेट किया जाएगा।)
    ( पाठ्यक्रम से जुड़ने की प्रक्रिया को समझने हेतु ट्यूटोरियल देखें - https://www.youtube.com/playlist?list=PLcsj1x9n9h4j0TtGCy_jKJyEX7y6mD6Rs ).
  • चरण 3: पाठ्यक्रम में उपलब्ध वीडियो देखें।
  • चरण 4: पाठ्यक्रम में दी गई सभी गतिविधियों को पूर्ण करें, जैसे - चर्चा मंच (Discussion Forum), सहभागी गतिविधियाँ, असाइनमेंट आदि।
  • चरण 5: अंतिम मूल्यांकन में भाग लें। इसके लिए तीन प्रयास किए जा सकते हैं। प्रमाणपत्र प्राप्त करने हेतु न्यूनतम 70% अंक प्राप्त करना आवश्यक है। यदि तीन प्रयासों के भीतर 70% या उससे अधिक अंक प्राप्त नहीं होते हैं, तो शिक्षार्थी प्रमाणपत्र प्राप्त करने के पात्र नहीं होंगे।
  • चरण 6: सभी निर्धारित मानदंडों को पूरा करने वाले शिक्षार्थियों को डिजिटल प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा, जिसे वे अपने प्रोफ़ाइल पृष्ठ पर देख एवं डाउनलोड कर सकेंगे।

किसी भी प्रकार की जानकारी अथवा सहायता हेतु ईमेल करें :training.helpdesk@ciet.nic.in अथवा संपर्क करें : 8800440559.

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